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Wednesday, December 19, 2018

ujjain temple mangal nath history in hindi

उज्जैन के mangalnath मंदिर के दर्शन करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ, यह मंदिर भौगोलिक द्रृस्टि से मकर रेखा जो की मध्य प्रदेश से गुजरती है के कर स्थित है।

मंगलनाथ मंदिर के निकट ही छिप्रा नदी बहती है, यह मंदिर एक माजिला भवन के ऊपर स्थित है, इस मंदिर  ही भूमाता का मंदिर भी है, जिसकी परिक्रमा करने से पृथ्वी की परिक्रमा करने का पुण्य प्राप्त होता है, और इसी मंदिर के पास में अन्य मंदिर भी है जिनका दर्शन करना सुखद है।  (Mangal Puja Ujjain)

मंगलनाथ मंदिर में पूजन की विधि बहुत ही सरल है, जिसे मंदिर के बहार प्रसाद की दुकानों पर बैठने बाले भी बता देंगे, जैसे ही आप पहुचेगे आपको कोई प्रसाद की दुकान वाला मधुर आवाज देगा, और एक टोकरी में फल, फूल, यंत्र, माला, इत्यादि वस्तुओ को भरकर आपको देगा साथ ही पूजन की विधि और उसके बाद किन किन वस्तुओ को अपने घर ले जाना है और क्या करना है ये भी बता देगा, इन समस्त पूजन सामग्रीओ से युक्त उस टोकरी का मूल्य होगा मात्र २५० रूपये। (मंगलनाथ पूजा उज्जैन)

अब टोकरी लेकर जैसे ही आप उस भव्य मंदिर में प्रवेश करेंगे आपको पंडित जी बाहर ही मिल सकते है जो कुछ नियम भी आपको बता देंगे, इसके बाद आप मंदिर में पुरुष और स्त्री की लाइन में अपने अनुसार लग जाए, और दर्शन करें व् सामग्री अर्पित करके श्रद्धा के साथ बाहर आ जाए। (कालसर्प दोष निवारण पूजा उज्जैन)

दान करना चाहे तो सिर्फ दानपात्र में ही करियेगा, मंदिर के बाहर आपको कुछ लोग मिलेंगे जो आपसे कुछ दान धर्म की आशा लगाए हुए बैठे होंगे, उनको निराश न करे और अपने सामर्थ के अनुसार दान अवश्य करिये, कुछ किन्नर भी आपसे दान की अपेक्षा रखते है, उनको दान देने के बाद उनका आशीर्वाद अवश्य लीजियेगा, जीवन में आनंद की प्राप्ति होगी। जय श्री महाकाल (Famous Pandit in Ujjain)

Thursday, December 6, 2018

मंगलनाथ के दरबार में भात पूजा से कैसे मंगल दोष दूर हो जाता

 वर्तमान समय में युवा वर्ग एक ऐसे वैज्ञानिक समय में मस्ती के साथ जी रहा है जिसमे शादी सिर्फ एक स्त्री पुरुष की स्वेक्षा चरिता का सम्बन्ध बना हुआ है, मतलब जब तक बनी तब तक साथ है नहीं तो अलग, क्युकी दोनों ही लोग स्वाबलंबी है, एक धन कामना सीख गया है तो दूसरा खाना बनाना, जबकि पहले  के समय स्त्री और पुरुष अपने कर्मो में सुखी थे, और किसी प्रकार का मनमुटाव होने की स्थिति में घर के बड़े बुजुर्गो की सलाह लेते थे, लेकिन अब मनमुटाव होने पर कानून की शरण लेकर अलग हो जाते है बिना सोचे की इस अलग होने से हमारे बच्चे पर क्या असर पड़ेगा।

अब इतने अति जागरूक अति विकसित मानसिकता के वैज्ञानिक युग में जीने वाले को हम उसकी कुंडली देखने या दिखाने को कह दे तो वो हमे अंधविश्वासी कहने लगते है, लेकिन सोचने की बात ये है अलग होने के दुष्परिणाम दोनों ही जानते है फिर भी उनकी जागरूकता और विकसित मस्तिक्स यहाँ काम नहीं करता है।

इस समस्या का निवारण हमारे वैदिक ज्योतिष शास्त्र में  है,हमारा ज्योतिष शास्त्र यही बताता है की सबकुछ जानते हुए भी मनुष्य क्यों गलत मार्ग पर भगता जा रहा है, उसके भगने का कारन है उसकी कुंडली में मंगल की अजीव स्थिति में होना, अब किसकी कुंडली में क्या दोष है ये तो उसकी कुंडली देखकर ही पता चलता है, फिर भी अगर पति पत्नी की अनवन एक का हमेशा दुखी रहना, एक का सदैव बीमार रहना, रोज घर में खटपट होना, किसी एक जातक के मंगली होने के लक्षण है, और इसे आप भी अपनी कुंडली में देख सकते है. (मंगलनाथ पूजा उज्जैन)

अगर आपकी कुंडली में ग्रहो की दशा के अनुसार पहले, चौथे, सातवें, आठवें और बारहवें घर में मंगल हो तो ऐसी स्थिति में पैदा हुआ जातक मांगलिक कहा जाता है, और इसका सर्वोत्तम उपाय है, उज्जैन के मंगलनाथ मंदिर में पूजा, उज्जैन में पंडित रमाकांत जी एक सुविख्यात ब्राह्मण है जो मंगल भात पूजा में सिद्धहस्थ है, उनका सम्पर्क सूत्र सख्या :- 9977525580

Famous Pandit in Ujjain ,  Mangal Puja Ujjain

Thursday, November 1, 2018

कुंडली मिलान क्यों जरूरी


भारतीय संस्कृति में विवाह जीवन के एक अनिवार्य संस्कारों में से एक है। ज्योतिष शास्त्र में शादी के लिए कुंडली मिलान को बहुत ही ज्यादा महत्वपूर्ण माना जाता है। विवाह दो लोगों के बीच बनने वाला एक ऐसा संबंध है जो 7 जन्मों तक एक दूसरे का साथ देते हैं। हिन्दू संस्कृति में विवाह होने से पहले लड़का और लड़की का कुंडली मिलान जरूर किया जाता है। हमारे माता-पिता और बुजुर्गो के अनुसार शादी शुदा जिंदगी अच्छी तरह से बीते इसके लिए विवाह होने से पहले दोनों की कुंडली का मिलान बेहद जरुरी होता है।

[यहाँ पर पंडित रमाकांत जी का एक संक्षित परिचय देना आवश्यक है, पंडित जी उज्जैन निवासी है और वैदिक कर्मकांडो में सिद्धस्त है, द्वारा बहुत प्रकार की पूजा वैदिक विधि से सम्पन्न हुयी है एवं करवाने वाले को लाभ भी हुआ है, पंडित जी कालसर्प-दोष, अर्क विवाह, मंगल भात पूजा, पितृदोष, रुद्राभिषेक पूजा, वास्तुदोष निवारण के लिए पुरे उज्जैन में प्रसिद्द है ]

कुंडली मिलान के बिना विवाह सफल नहीं माना जाता है। कुंडली मिलान से दोनों इंसानों के रिश्तों की स्थिरता के बारे में सही जानकारी प्राप्त की जा सकती है। कुंडली मिलान के बिना एक अच्छे जीवन साथी की खोज पूरी नहीं होती। इसलिए विवाह से पूर्व कुंडली मिलान बहुत जरूरी होता है। [मंगलनाथ पूजा उज्जैन]

दो लोगों का कुंडली मिलान करते समय सबसे पहले उनके गुणों का मिलाना करना होता है। किसी भी व्यक्ति की कुंडली में 8 प्रकार के गुणों का मिलान किया जाता है। ये गुण इन प्रकार के होते है - वर्ण, वश्य, तारा, योनि, गृह मैत्री, गण, भकूट और नाड़ी। विवाह में इन गणों का मिलान बहुत जरूरी होता है। गुण मिलान के बाद कुल 36 अंक होते है। लड़का और लड़की दोनों की कुंडली में 36 में से 18 मिलने पर शादी को सफल माना जाता है। सफल शादी के लिए 36 में से 18 गुणों का मिलना बहुत जरूरी माना जाता है। [ कालसर्प पूजा उज्जैन]

ज्योतिष के अनुसार आइए जानते हैं विवाह के लिए कितने गुण का मिलना शुभ होता है और कितने अशुभ:

18 या इससे कम गुण मिलने पर ज्यादातर विवाह के असफल होने की संभावना होती है।
जिस वर-वधु के कुंडली मिलान में 18-24 गुण मिलते हैं ऐसा विवाह सफल तो होता है लेकिन जीवन में कई तरह की परेशानियों का सामना करने की संभावना ज्यादा होती है। जिस किसी के गुण मिलान में 24 से 32 गुण मिलते हों उनका विवाह सफल माना जाता है। [कालसर्प दोष निवारण पूजा उज्जैन]
अगर किसी के कुल 36 गुण मिलते हों उसकी शादी बहुत ही शुभ मानी जाती है और बिना कोई परेशानी के दोनों का जीवन बड़े सुख और समृद्धि से बीतता है। कुंडली मिलान क्यों जरूरी
विवाह पूर्व कुंडली मिलान से वर और वधु के नक्षत्र और ग्रह एक दूसरे के लिए अनुकूल है इस बारे में पता लगाया जाता है। अगर दोनों के ग्रह और नक्षत्र सही होते है तो वैवाहिक जीवन सुखमय रहता है। वहीं अगर दोनों के ग्रह-नक्षत्र प्रतिकूल होते हैं तो इनके जीवन में तमाम तरह की परेशानियां आती हैं। इसलिए ज्योतिष शास्त्र में विवाह पूर्व कुंडली मिलान की परंपरा होती है। [सर्प दोष पूजा उज्जैन]

कुंडली मिलान कैसे
कुंडली मिलान करते समय वर-वधु का नाम, जन्मतिथि, जन्मस्थान और जन्म का समय बताना होता है जिसके आधार पर दोनों की कुंडलियों का अध्ययन करके उनके वैवाहिक जीवन का आंकलन किया जाता है।

फ्री में कैसे करें कुंडली मिलान
हिन्दू परिवार में जब किसी लड़का या लड़की का विवाह तय होता है तो उसके पहले दोनों की जन्म कुंडली का मिलान किया जाता है। इस कुंडली मिलान से यह पता करने की कोशिश की जाती है कि दोनों का कुल 36 गुणों में से कितने गुण मिलते है। साथ ही दोनों के भाग्य और दुर्भाग्य का भी मिलान किया जाता है। अमर उजाला अपने पाठकों को बिना किसी शुल्क के भुगतान के शादी के बंधन में बंधने वाले जोड़ियों का कुंडली मिलान करने की सुविधा प्रदान कर रहा है। यहां पर वर-वधु का पूरा विवरण डालकर कुंडली मिलान किया जा सकता है। [Kaal sarp Puja Ujjain]