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Thursday, January 17, 2019

Ujjain Mahakaal Bhasm Arti Rules in Hindi

उज्जैन महाकालेश्वर भगवान शिव की नगरी है, यह महान मंदिर छिप्रा नदी के निकट बना हुआ है, यहाँ पर वैसे तो आने भर से सब संकट समाप्त हो जाते है, फिर भी अगर आप भस्म आरती में जाकर भगवान शिव लिंग को स्पर्श करने का सौभाग्य प्राप्त कर पाए तो उसका विशेष लाभ होगा, किन्तु प्रातः कालीन होने वाली भस्म आरती के कुछ विशेष नियम है, जो की आपके लिए जान लेना बहुत जरुरी है :



भष्म आरती के नियमो की जानकारी 

  • भष्म आरती में कुछ निश्चित लोगो को ही अनुमति प्रदान की जाती है, वर्तमान में इसकी बुकिंग ऑनलाइन होती है, इसके लिए आप घर वैठे आधिकारिक वेबसाइट से बुकिंग करवा सकते है, 
  • बुकिंग करते समय आपको अपना फोटो और पहचान पत्र देना अनिवार्य है और इसे ही लेकर जाना होगा 
  • भष्म आरती में जाने के लिए प्रातः २ बने से लाइन लगनी शुरू हो जाती है, जितना पहले जायेगे उतना जल्दी दर्शन हो जायेगा 
  • आपको इसके लिए सुबह जाग कर स्नान करके पहुंचना होगा 
  • महिलाये सिर्फ साड़ी और पुरुष सिर्फ धोती में भी प्रवेश कर सकते है, भले ही आप स्वेटर इत्यादि ठंड से बचने के लिए ले जाए, लेकिन उनको गर्भगृह में जाने से पहले छोड़ना होगा, जो आप बाद में ले सकते है, 
  • कोशिश करिये की अपने साथ छोटे बच्चे न ले जाए, और अगर ले जाए तो पर्याप्त जन जाए, जिससे जब एक सदस्य  गर्भगृह में जाए तो बच्चो को कोई अपने पास संभाल सके 
  • शिव लिंग पर जल चढाने के लिए पात्र  अर्थात लौटा अवश्य ले जाए, जिसमे आपको मंदिर के अंदर से जल भरना होगा. 
  • जलाभिषेक के बाद भगवान का शृंगार होता है जिसमे आप शांति से बैठे रहे 
  • इसके बाद भष्म आरती होती है जो की अंतिम जली हुयी चिता की भष्म से होती है 
  • इसके बाद आप बापस अपने होटल या धर्मशाला में  है 
उज्जैन में संपर्क करें इन पूजनो के लिए ; सर्प दोष पूजा उज्जैन | Kaal sarp Puja Ujjain | मंगलनाथ पूजा उज्जैन | कालसर्प पूजा उज्जैन | कालसर्प दोष निवारण पूजा उज्जैन | Famous Pandit in Ujjain | kaal sarp dosh puja ujjain | kaal sarp puja in ujjain | kaal sarp dosh puja in ujjain | Mangal Puja Ujjain

Tuesday, December 25, 2018

Best Pandit for Kaal Sarp Dosh in Ujjain

So many of us are ask to our friends and family members who visited earlier Ujjain about Kaal Sarp Dosh Puja in Ujjain, but unfortunate they all not know about this, because only a few of them participated in this Puja at Ujjain.

But the question is very important, how would you find best pandit, as of now every pandit having their website over the internet, most of them are in their native language means in hindi that we all can understand, so how do you get the wisdom that this Pandit Ji is best for the Puja and other activities in Ujjain.

So, here I am going to share some personal experience of Ujjain's pandit with their websites, I seen more than 10 websites of Ujjain's Pandit who can perform the Kaal Sarp dosh Puja in Ujjain and even Mangal Puja in Ujjain, as per their websites.

When I visited their website I collected some information [1] education [2] age [3] family background [4] total experience of puja [5] education from which institute etc, on the basis of these you can understand who is best, and above the all I seen the aura of the face that play a very important role in Puja

This is my perception, you can create your own list of judgement the Pandit ji for Puja

Know a list of various pujan ; Kaal sarp Puja Ujjain, kaal sarp dosh puja in ujjain, kaal sarp dosh puja ujjain, kaal sarp puja in ujjain

Friday, September 28, 2018

जाने आपकी कुंडली में काल सर्प दोष है कि नहीं

कालसर्प एक ऐसा योग है जो जातक के पूर्व जन्म के किसी जघन्य अपराध के दंड या शाप के फलस्वरूप उसकी जन्मकुंडली में परिलक्षित होता है। व्यावहारिक रूप से पीड़ित व्यक्ति आर्थिक व शारीरिक रूप से परेशान तो होता ही है, मुख्य रूप से उसे संतान संबंधी कष्ट होता है। या तो उसे संतान होती ही नहीं, या होती है तो वह बहुत ही दुर्बल व रोगी होती है। उसकी रोजी-रोटी का जुगाड़ भी बड़ी मुश्किल से हो पाता है। धनाढय घर में पैदा होने के बावजूद किसी न किसी वजह से उसे अप्रत्याशित रूप से आर्थिक क्षति होती रहती है। तरह तरह के रोग भी उसे परेशान किये रहते हैं।

जब राहु के साथ चंद्रमा लग्न में हो और जातक को बात-बात में भ्रम की बीमारी सताती रहती हो, या उसे हमेशा लगता है कि कोई उसे नुकसान पहुँचा सकता है या वह व्यक्ति मानसिक तौर पर पीड़ित रहता है।
जब लग्न में मेष, वृश्चिक, कर्क या धनु राशि हो और उसमें बृहस्पति व मंगल स्थित हों, राहु की स्थिति पंचम भाव में हो तथा वह मंगल या बुध से युक्त या दृष्ट हो, अथवा राहु पंचम भाव में स्थित हो तो संबंधित जातक की संतान पर कभी न कभी भारी मुसीबत आती ही है, अथवा जातक किसी बड़े संकट या आपराधिक मामले में फंस जाता है।

  • जब कालसर्प योग में राहु के साथ शुक्र की युति हो तो जातक को संतान संबंधी ग्रह बाधा होती है।
  • जब लग्न व लग्नेश पीड़ित हो, तब भी जातक शारीरिक व मानसिक रूप से परेशान रहता है।
  • चंद्रमा से द्वितीय व द्वादश भाव में कोई ग्रह न हो। यानी केंद्रुम योग हो और चंद्रमा या लग्न से केंद्र में कोई ग्रह न हो तो जातक को मुख्य रूप से आर्थिक परेशानी होती है।
  • जब राहु के साथ बृहस्पति की युति हो तब जातक को तरह-तरह के अनिष्टों का सामना करना पड़ता है।
  • जब राहु की मंगल से युति यानी अंगारक योग हो तब संबंधित जातक को भारी कष्ट का सामना करना पड़ता है।
  • जब राहु के साथ सूर्य या चंद्रमा की युति हो तब भी जातक पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है, शारीरिक व आर्थिक परेशानियाँ बढ़ती हैं।
  • जब राहु के साथ शनि की युति यानी नंद योग हो तब भी जातक के स्वास्थ्य व संतान पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है, उसकी कारोबारी परेशानियाँ बढ़ती हैं।
  • जब राहु की बुध से युति अर्थात जड़त्व योग हो तब भी जातक पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है, उसकी आर्थिक व सामाजिक परेशानियाँ बढ़ती हैं।
  • जब अष्टम भाव में राहु पर मंगल, शनि या सूर्य की दृष्टि हो तब जातक के विवाह में विघ्न, या देरी होती है।
  • यदि जन्म कुंडली में शनि चतुर्थ भाव में और राहु बारहवें भाव में स्थित हो तो संबंधित जातक बहुत बड़ा धूर्त व कपटी होता है। इसकी वजह से उसे बहुत बड़ी विपत्ति में भी फंसना पड़ जाता है।
  • जब लग्न में राहु-चंद्र हों तथा पंचम, नवम या द्वादश भाव में मंगल या शनि अवस्थित हों तब जातक की दिमागी हालत ठीक नहीं रहती। उसे प्रेत-पिशाच बाधा से भी पीड़ित होना पड़ सकता है।
  • जब दशम भाव का नवांशेश मंगल/राहु या शनि से युति करे तब संबंधित जातक को हमेशा अग्नि से भय रहता है और अग्नि से सावधान भी रहना चाहिए।
  • जब दशम भाव का नवांश स्वामी राहु या केतु से युक्त हो तब संबंधित जातक मरणांतक कष्ट पाने की प्रबल आशंका बनी रहती है।
  • जब राहु व मंगल के बीच षडाष्टक संबंध हो तब संबंधित जातक को बहुत कष्ट होता है। वैसी स्थिति में तो कष्ट और भी बढ़ जाते हैं जब राहु मंगल से दृष्ट हो।
  • जब लग्न मेष, वृष या कर्क हो तथा राहु की स्थिति 1ले 3रे 4थे 5वें 6ठे 7वें 8वें 11वें या 12वें भाव में हो। तब उस स्थिति में जातक स्त्री, पुत्र, धन-धान्य व अच्छे स्वास्थ्य का सुख प्राप्त करता है।
  • जब राहु छठे भाव में अवस्थित हो तथा बृहस्पति केंद्र में हो तब जातक का जीवन खुशहाल व्यतीत होता है।
  • जब राहु व चंद्रमा की युति केंद्र (1ले 4थे 7वें 10वें भाव) या त्रिकोण में हो तब जातक के जीवन में सुख-समृद्धि की सारी सुविधाएं उपलब्ध हो जाती हैं।
  • जब शुक्र दूसरे या 12वें भाव में अवस्थित हो तब जातक को अनुकूल फल प्राप्त होते हैं।
  • जब बुधादित्य योग हो और बुध अस्त न हो तब जातक को अनुकूल फल प्राप्त होते हैं।
  • जब लग्न व लग्नेश सूर्य व चंद्र कुंडली में बलवान हों साथ ही किसी शुभ भाव में अवस्थित हों और शुभ ग्रहों द्वारा देखे जा रहे हों। तब कालसर्प योग की प्रतिकूलता कम हो जाती है।
  • जब दशम भाव में मंगल बली हो तथा किसी अशुभ भाव से युक्त या दृष्ट न हो। तब संबंधित जातक पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ता।
  • जब शुक्र से मालव्य योग बनता हो, यानी शुक्र अपनी राशि में या उच्च राशि में केंद्र में अवस्थित हो और किसी अशुभ ग्रह से युक्त अथवा दृष्ट न हो रहा हो। तब कालसर्प योग का विपरत असर काफी कम हो जाता है।
  • जब शनि अपनी राशि या अपनी उच्च राशि में केंद्र में अवस्थित हो तथा किसी अशुभ ग्रह से युक्त या दृष्ट न हों। तब काल सर्प योग का असर काफी कम हो जाता है।
  • जब मंगल की युति चंद्रमा से केंद्र में अपनी राशि या उच्च राशि में हो, अथवा अशुभ ग्रहों से युक्त या दृष्ट न हों। तब कालसर्प योग की सारी परेशानियां कम हो जाती हैं।
  • जब राहु अदृश्य भावों में स्थित हो तथा दूसरे ग्रह दृश्य भावों में स्थित हों तब संबंधित जातक का कालसर्प योग समृध्दिदायक होता है।
  • जब राहु छठे भाव में तथा बृहस्पति केंद्र या दशम भाव में अवस्थित हो तब जातक के जीवन में धन-धान्य की जरा भी कमी महसूस नहीं होती।